जिंदगी बदल देगी | Life Changing Story

 जिंदगी बदल देगी | Life Changing Story 

Life changing story
Life changing story 


कहते हैं कि पुरानी रूस में तीन फकीर बहुत प्रसिद्ध हो गए। वे इतनी प्रसिद्ध हो गई कि वहां का जो सबसे बड़ा पादरी था उसे उन तीनों पागलों से बड़ी होने लगी। क्योंकि धीरे धीरे लोगों ने चर्च में आना ही बंद कर दिया था। चर्च से लोगों की भीड़ बिल्कुल गायब सी हो गई थी। अब सभी लोगों ने उन तीन फकीरों के पास जाना शुरू कर दिया था। वहां का प्रधान पादरी सोचता कि ये तीनों कौन हैं जो मेरे संत बन गए। क्योंकि ईसाइयत में ये प्रथा है कि जब तक चर्च किसी इनसान को मान्यता ना दे दे तब तक वो संत नहीं बन सकता। पादरी बना पैसा नहीं लगा क्योंकि लोगों में चर्च की लोकप्रियता दिन कम होती जा रही थी। लेकिन एक दिन तो हद ही हो गई। पादरी पूरे दिन चर्च में बैठा रहा, लेकिन एक भी व्यक्ति चर्च में आए पादरी के क्रोध का ठिकाना न रहा। उसने निश्चय किया कि आज तो उन दिनों वकीलों की खैर नहीं। आज तो मैं उन तीनों को सबक सिखाकर ही रहूंगा। वह अपनी पूरी पादरी की इस में तैयार हुआ। उसने सोने का ताज पहना हाथ में प्रधान पादरी का प्रतीक वाला सोने का डंडा लिया और चल पड़ा। उसी में वे तीनों एक बड़ी सी झील के उस पार रहा करते थे। पादरी एक नाव में बैठकर झील के उस पार पहुंचा। थोड़ा आगे चलने पर उसे एक बड़े से पेड़ के नीचे तीन सीधे सादे इंसान बैठे हुए दिखाई दिए। वे तीनों पालथी मारकर चुपचाप उसपर नीचे बैठे हुए थे। पादरी ने उनके पास जाकर कहा, क्या तुम तीनों अपनी पसंद हो। जिनके कारण लोगों ने मेरे चर्च में आना



बंद कर दिया। उन दिनों ने कहा, संत अरे नहीं नहीं। हम किस बात की संत। हम संत बनने के लायक नहीं है। ये तो यहां के लोग कहते हैं कि हम तीनों संत थे। पता नहीं कितने ही झूठी अफवाह फैला दी जिसे सुनकर लोगों की भीड़ यहां आती है। हम तो रोज ही ये मना करती हैं कि हम बताया करो, लेकिन हम जितना मना करते हैं विरोधी बरती जा रही है। हम इस भीड़ से परेशान हो चुके हैं। ये भीड़भाड़ मिलती है। हम तो एकांत में रहना चाहते हैं। अच्छा हुआ अब आगे अब आप बचाइए हमें इस भीड़ से या सुबह पादरी दो। खुशी से फूले न समाया। सोचने लगा ये तो बड़े बुरे लोग निकली खटिया खड़ी कर दुआ की होगी। आज तो तीनों को लाइन में लगाकर ही जाऊंगा। पादरी ने पूछा, लेकिन तुम क्यों करते क्या हो। उन्होंने कहा कुछ नहीं बस इस पेड़ के नीचे बैठकर इश्वर की प्रार्थना कर दी। पादरी ने पूछा बलबीर कमाल उन दिनों ने अपना सिर नीचे झुका लिया था। पादरी पूछा क्या हुआ? उन्होंने कहा, अब क्या बताएं आपसे। हम तीनों ही अनपढ़ हैं। हमें पढ़ना नहीं आता। मलवा लाकर भी क्या करेंगे। यह सुनकर तो वह पादरी और भी खुश हुआ। सोचने लगा अनपढ़ हैं। फिर भी इतने सारे लोग बेवकूफ बना रखा है। इनकी तो मैं मटियामेट कर डालूंगा। पूरे शहर के सामने इनकी बेइज्जती करूंगा। पादरी ने पूछा कि तुम लोग प्रार्थना कैसे करते हो। चर्च की प्रार्थना तो तुम्हें याद होगी न। ये 100 रोटियों ने फिर से अपना सिर झुका लिया। पादरी ने पूछा अब क्या



हुआ तो लोगों ने फिर से प्रतिमा को झुका लिया। उन्होंने कहा, क्या बताएं? वही नजारे यात्री बताते हुए कि हमें प्रार्थना नहीं आती। पादरी यासिर ने कहा, क्या तुम ज्यादा बुनियादी उल्टी होने न में अपना सिर हिला दिया। पादरी ने कहा कि तुम क्यों प्रार्थना करते कैसे हो। उन्होंने कहा, आपके चर्च की प्रार्थना तो बड़ी लंबी चौड़ी है। हम अनपढ़ देवारों को याद ही न हो पाई और फिर गलत पढ़ने का कोई मतलब भी नहीं है। इसने बहुत सोचने के बाद बहुत गड़बड़ाने के बाद हमने अपनी खुद की एक प्रार्थना बना ली। यह सुन पादरी जोर से चिल्लाया क्या तुम अपनी खुद की प्रार्थना बना ली। प्रार्थना तो सर्वमान्य होती है शास्त्रों में लिखी होती है। हजारों हजारों साल पुरानी होती है। जीसस को तो प्रार्थना को परमात्मा ने सिखाई थी, लेकिन तुम लोगों ने भी खुद की बना ली। उन्होंने कहा, हम से बहुत बड़ी गलती हो गई। हमें माफ करें। हमारे वर्तमान साल हमें कुछ नहीं पता। अब आप हमें जो प्रार्थना सिखाएंगे, हम वही प्रार्थना करेंगे। हम आपके पैर पड़तीं। हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई। हमें क्षमा करें और आप हमें अपनी वही बात सिखाएं। लेकिन पादरी के मंत्री जी क्या सजा दी कि देखो तो उन्होंने कौन सी पात्र बनाई है। पादरी ने कहा, पहले तुम लोग मुझे अपनी बात न सुनाऊं। उन्होंने कहा नहीं महराज हमलावरों की प्रार्थना का कोई मतलब नहीं। आप उन लोगों से मिलना न करें। आप हमें अपनी वाली बातें सिखाएं। लेकिन पादरी नहीं माना। इसलिए पादरी के बार बार कहने पर आखिर में वो अपनी प्रार्थना मानने के लिए राजी हो गई



। उन्होंने कहा, हमने बहुत सोचा बहुत विचार किया, लेकिन हमें कोई प्रार्थना ना सोचे कि हमें याद आया कि ईसाइयत में तो भगवान के तीन रूपों को माना गया है। इसलिए हमने इसी पर अपनी प्रार्थना बना दी। अगर आप हमारी प्रार्थना सुनेंगे तो हम पर हसेंगे। इसके बाद भी तीनों चुप हो गए। पादरी ने कहा, अरे बताओ नहीं हटूंगा नहीं। उन्होंने कहा, भगवान के तीन रूप इसे हमने प्रार्थना बना दी थी। हम कि तुम भी तीन। हम पर कृपा करो। यह सुनते गंभीर पादरी भी अनपढ़ मुर्ग़। जिन्दगी में बहुत याद न होने पर ऐसी प्रार्थना कभी न सुन व मन ही मन सोचने लगा। बड़े बेवकूफ लोगों आज तुम किया तो ठिकाने लगाकर जाऊंगा। इन दिनों को मेरे पास चर्च में आना ही पड़ेगा। उन तीनों ने कहा, आप हमारी छोड़िये अपनी प्रार्थना दिखाई। हम आज से वही करेंगे। पादरी ने उन्हें चर्च की प्राथना सिखानी शुरू की। उन्होने कहा, एक बार और पादरी ने कुछ माई उन्होंने कहा, एक बार और पादरी किसी बर्थ में। उन्होंने कहा, एक बार और कहीं भूल न जाएं। पत्नी ने सुनाई उन्होंने कहा, एक काफी बार और पादरी ने कहा घबराओ मत कभी कभी चर्च भी आया करो। धीरे धीरे तुम लोगों की भी जिंदगी भरने लगेगी और अगर हो जाऊंगी तो ये प्रार्थना भी सीख जाऊंगी। उन्होंने कहा, जी जैसी आप क्या दिया। पादरी बड़ा खुश हुआ। उसने कहा, तुम लोग डरना मत चर्चा हो। मैं तुम्हें माफ़ कर दूंगा और लोगों से भी नाम करवा दूंगा। उन्होंने कहा, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आप बड़े महान इंसान हैं। पादरी ने


सोचा चलो इन सुंदर छोटी इमारतों को तो लाइट ले आया वह भी नाव पर बैठकर वापस जाने लगा। नौ अभी झील के बीचोबीच पहुंची ही थी कि पीछे से कुछ लोगों के चिल्लाने की आवाज आई। पादरी और मंत्री ने पीछे मुड़कर देखा तो उनकी आगे पटी पड़ी रह गई। वे तीनों पादरी को पुकारते हुए झील के पानी पर दौड़ती हुई चली आ रही थीं। वे तीनों पानी पर ऐसे दौड़ रही थी मानो कोई जमीन पर दौड़ रहा हो। यह देखकर दो पादरी के हाथ से वह सोने का डंडा छूटकर महीनों पर गिर गए। यह चमत्कार तो आज तक केवल जीसस नहीं करके दिखाया था। वे तीनों भागती हुई नाव के किनारे आकर खड़ी हो गई और पादरी से कहने लगी। आप वो प्रार्थना हमें एक बार और सुना दें। हम उसे ढूंढ रहे हैं। वह कहता है जो रोती है ये कहता है रोती है। मैं कहता हूं, ऐसे शुरू होती है। हम तीनों में बहस शुरू हो चुकी है। अब हम बहस करें या प्रार्थना करें। इसलिए आप हमें वो प्रार्थना एक बार और ना दें। पादरी तो झुककर उनके पैर पकड़ लिए और कहने लगा। अब तक जो भी बताया हूं जो कुछ भी कहा है सब कुछ भूल जाओ। तुम्हारी प्रार्थना जीती और मेरी हारी। तुम्हारी प्रार्थना ही श्रेष्ठ है। श्रेष्ठ है क्योंकि वह सुनी गई है और सच तो ये है कि अबसे मैं भी तुम्हारी वाली ही प्रार्थना करूंगा। गलती तो मुझसे हुई है जो मैंने तुम्हारी प्रार्थना को कम समझा जबकि कमी तो मेरी श्रद्धा मेरी आस्था नहीं थी। कमजोर तो मेरी प्रार्थना थी, इसलिए आप लोग मुझे क्षमा करें। बड़ा उपकार होगा। ये


तीनों पापी बोलते रहे कि आप एक बार हमें अपनी वाली प्रार्थना और सुना दें। लेकिन वह पादरी चुपचाप अपना सिर नीचे झुकाए वहां से चला गया। यह कहानी हमें सिखाती है कि ये जरूरी नहीं कि हमारे द्वारा की गई कातना शास्त्र सीखनी दी हो, वो बहुत पश्चिमी होनी चाहिए। लाखों लाखों लोगों द्वारा मान्यता प्राप्त होने के लिए अगर हमारी प्रार्थना सच्ची हो। सच्चे मन से की गई है तो वो परमात्मा के द्वारा जरूर सुनी जाएगी। फिर चाहे वो दो संतों की साधारण सी ही प्रार्थना क्यों न हो। उन तीन साधुओं की कहानी से सीखने को तो हमें ही मिलता है कि हम चाहे कुछ भी करें, लेकिन उसे दिखावे के उद्देश्य से न करें। हम जब भी किसी काम को करें तो हमारी कोई आत्मा उसका में उतर जाती है। उस काम के प्रति हमारा पूरा समर्पण होना चाहिए। अगर हम हर काम को इसी तल्लीनता के साथ कर पाएं तो हर काम में हमारी सफलता निश्चित है। जैसे कि 29 साधुओं के साथ हुआ था। उन्होंने अपनी प्रार्थना को इतने समर्पण भाव के साथ किया था कि प्रार्थना उन्होंने नहीं। उनकी आत्मा ने की थी कि उनकी प्रार्थना इतनी सच्ची हो गई कि इस पर भी उनकी प्रार्थना को सुने बिना न रह सका।



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