अब Facebook और Youtube चलाने के लिए नहीं होगी इंटरनेट की जरुरत $

 

अब Facebook और Youtube चलाने के लिए नहीं होगी इंटरनेट की जरुरत !


अब Facebook और Youtube चलाने के लिए नहीं होगी इंटरनेट की जरुरत $
अब Facebook और Youtube चलाने के लिए नहीं होगी इंटरनेट की जरुरत $


जब हमारी आपकी लाइफ में इंटनेट की एंट्री हुई तो पूरी दुनिया में क्रांति मच गई। इंटरनेट पूरे विश्व की जरूरत बन गया, लेकिन अब भविष्य में इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि डीटूएच टेक्नोलॉजी इंटरनेट को रिप्लेस कर देगी और क्रांति मचा देगी। डीटीएच तकनीक कैसी होगी कि आपको फेल वीडियो या कुछ भी देखने पढ़ने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी।

जी हां, सही सुना आपने अब आपको इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि जल्द ही ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित होने वाली है, जिससे आप वीडियोस यू ट्यूब या फिर आनलाइन गेम आसानी से खेल पाएंगे।

दरअसल इस टेक्नोलॉजी के तहत आपको फ्री में डेटा प्रोवाइड किया जाएगा, जिसके जरिए आप सोशल मीडिया के इस समय में सब कुछ आसानी से बिना अपने नेट के देख पाएंगे। वाकई यह टेक्नोलॉजी काफी फायदेमंद है तो जानने के लिए बने रहिए।

हमारे साथ Artical के अंत तक। डीयू टेक्नोलॉजी को ला रहा है। डिपार्टमेंट आफ टेलीकम्युनिकेशन और भारत का पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर। जिसे प्रसार भारती कहते हैं दोनों मिलकर डीयू एप टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। इसके लिए दौड़नी आईआईटी कानपुर के साथ इस तकनीक को विकसित करने के लिए पार्टनरशिप की है और इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई है।

डीटीएम टेक्नोलॉजी के हैं टीटीएम तकनीक ऐसी उन्नत किस्म की टेक्नोलॉजी है जिसकी बदौलत आप बिना इंटरनेट के वो सभी काम कर सकते हैं जो आप अभी इंटरनेट की मदद से करते हैं। टीटू एम टेक्नोलॉजी से आपके मोबाइल या कंप्यूटर में मल्टी मीडिया का सीधा प्रसारण होने लगेगा। आसान भाषा में कहें तो जैसे बिना इंटरनेट के चलने वाले एफएम रेडियो आप तक पहुंचता है। वैसे टीटीएम के जरिये मल्टी मीडिया कंटेंट आपको बिना इंटरनेट के मिलने लगेगा |

डीयू का फुल फॉर्म डोर टू मोबाइल है। सीधे शब्दों में कहें तो इस तकनीक के आने के बाद बिना किसी केबल, इंटरनेट डिश एंटीना के आप कुछ भी वीडियो फिल्म न्यूज आर्टिकल देख सकेंगे। इतना ही नहीं इसके माध्यम से आप ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया भी चला सकेंगे।

डीटीएच टेक्नोलॉजी कैसे काम करता है बिल्कुल वैसे ही जैसे एफएम काम करता है। डॉट के सेक्रेटरी की राजारमन का कहना है कि बैंड 526 से 582 मेगाहर्ट्स, मोबाइल और ब्राडकास्ट दोनों सर्विसेस के लिए काम कर सकता है। दौड़ ने इस बैंड की स्टडी के लिए एक कमेटी गठित की है।

अब इस बैंड का इस्तेमाल सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से देश भर में टीवी ट्रांसमीटर सक्रिय हो रहा है। भारत में एम कब शुरू होगा डॉट और आईआईटी कानपुर इस पर काम कर रही है।

डीटीएम टेक्नोलॉजी शुरू होने के बाद खासतौर पर उन लोगों को फायदा होगा। जिन तक इंटरनेट और डिश कनेक्शन अवेलेबल नहीं है और न ही मोबाइल टावर है। लोगों का इंटरनेट का खर्च कम होगा क्योंकि डीटीएच सर्विस काफी किफायती होगी, लेकिन इससे उन लोगों को नुकसान होगा जिनका बिजनेस इंटरनेट सर्विस के दम पर चलता है।

हालांकि इस टेक्नोलॉजी को आप कुछ ऐसे समझे डी टू एम को ऐसे समझें कि मान लीजिए कि बिना इंटरनेट के आपके मोबाइल में एक फिर भेज दी जाए और एफएम रेडियो की तरह बिना नेट के चलने लगे डॉट हाल ही में इस तकनीक पर काम कर रहा है कि आपके मोबाइल में सीधा प्रसारण कर दिया जाए। जैसे आपको अपने मोबाइल में एफएम चलाने के लिए किसी भी प्रकार के नेट की आवश्यकता नहीं होती। वो डायरेक्ट रेडिएशन से कनेक्ट हो जाता है। उसी


प्रकार से भारत सरकार प्रयास में लगी हुई है कि जितने भी प्रकार की ब्रॉडकास्टिंग सेवाएं हैं जैसे अमेजन, नेट लाइक, हॉटस्टार, सोनी, टीवी, स्टार प्लस आदि यह सब बिना इंटरनेट के चलने लगे तो सोचिए कितना फायदा होगा।

आम लोगों का अगर ये सेवाएं डीटीएच तकनीक से शुरू हो जाए तो किसी प्रकार की प्रक्रिया को डरे टू मोबाइल सर्विस कहा जाता है। बिना इंटरनेट सीधे होगा। मोबाइल पर मल्टी मीडिया कंटेंट का प्रसारण ये टेक्नोलॉजी वैसे ही कुछ काम करेगी। जैसे मोबाइल पर एफएम रेडियो डीटीएच टेक्नोलॉजी को ब्रॉड बैंड और रोड का से मिलाकर बनाया जाएगा। आईआईटी कानपुर से साझेदारी कर डॉट और प्रसार भर्ती कर रही है।

इस पर काम देखिए हम सभी ने फ्लॉपी डिस्क का जमाना जरूर न देखा हो, लेकिन सीडी और डीवीडी से तो जरूर परिचित होंगे। फ्लॉपी डिस्क एक तरह की डेटा स्टोरेज डिवाइस होती थी। फ्लॉपी डिस्क 1970 से 1990 के दशक में बहुत लोकप्रिय थी। फ्लॉपी डिस्क के बाद हम सभी सीडी और डीवीडी के युग में आए और इसके बाद प्रवेश किया। पेनड्राइव के युग में पेनड्राइव का युग भी लगभग अपनी अंतिम अवस्था में चल रहा है, क्योंकि स्टोरेज के लिए पेनड्राइव की जगह अब लेटेस्ट मुंबई ले रही है।

जहां पहले एक जीबी स्टोरेज के लिए बड़े बड़े हार्ड डिस्क लेकर चलते थे। वही आज एक जीबी स्टोरेज मोबाइल में आने लगे हैं। इसके अलावा आजकल क्लाउड स्टोरेज है जहां हम इंटरनेट के माध्यम से अपना डेटा सेव करके रख सकते हैं। अब थोड़ा सा दूसरी तकनीक में चलते हैं। आप सभी ने एंटीना वाले टीवी देखे होंगे, जिसमें कुछ चैनल आया करते थे। उसके बाद केबल टीवी आया। जैसे डिश टीवी टाटा स्काई डीटीएच।

इसमें बहुत से चैनल देखे जा सकते हैं। यह आज भी बहुत चल रहा है, लेकिन उतना प्रभावी नहीं रहा जितना आज से कुछ साल पहले था। अभी आप आपसे ही पूछ लिया जाए कि आपने आखरी बार टीवी पर मूवी या कुछ भी क्या देखा है तो आप याद करने लग जाएंगे क्योंकि पूरी दुनिया बड़ी तेजी से मोबाइल पर शिफ्ट होती जा रही है।

टेक्नोलॉजी ने पिछले 20 सालों में इतनी तेजी से विकास कर लिया है कि सब कुछ मोबाइल में शिफ्ट हो गया है। अगर इतनी ही तेजी से सब कुछ चलता रहा तो फेसबुक तकनीकी के जिस दुनिया में प्रवेश कर रहा है, जिसका नाम है मेटा वर्क।

इस तकनीक में शायद भविष्य में मोबाइल और टीवी की भी आवश्यकता न रहे। केवल आप अपने चेहरे पर एक ग्लास लगाएंगे और सब कुछ आपके सामने चलने लगे तो दूर संचार विभाग और प्रसार भारती के समय डी तकनीक के बारे में बात कर रहे हैं और इसके लिए इन्होंने आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर ट्रायल भी कर लिए हैं कि किस प्रकार से इस तकनीक को लाया जाए।

इस टेक्नोलॉजी से बिना इंटरनेट कनेक्शन के सीधे मोबाइल फोन पर लाइव न्यूज़, स्पोर्ट्स और ओटीटी कंटेंट का प्रसारण किया जा सकेगा। खास बात यह कि सीधे मोबाइल में प्रसारित होने वाले वीडियो और अन्य मल्टी मीडिया कंटेंट बिना बफरिंग के अच्छी क्वॉलिटी में प्रसारित होंगे, क्योंकि इसके प्रसारण में इंटरनेट की आवश्यकता ही नहीं होगी।

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नागरिकों से जुड़ी किसी खास जानकारी को सीधे उनके मोबाइल में प्रसारित किया जा सकेगा। जिससे फेक न्यूज रोकने, इमरजेंसी अलर्ट जारी करने और आपदा प्रबंधन में सहायता करने में मदद मिलेगी |


क्या होता है कि कभी कभी किसी आपदा या समस्या की वजह से इमरजेंसी में नाइट में बैन लगाना पड़ता है। इससे आम नागरिक न्यूज से अपडेट नहीं रह पाते हैं। इसलिए आपदा की परिस्थिति में भी टीवी के माध्यम से लोगों तक सही जानकारी और उसको पहुंचा जा सकेगा।

डेटा नहीं खर्च होने से स्मार्ट फोन यूजर्स को कम पैसों में मिलेगी सुविधा। इसके अलावा उन ग्रामीण यूजर्स को होगा फायदा जिनके पास इंटरनेट सुविधा कम या सीमित है। मोबाइल ऑपरेटर्स वीडियो का लोड हटने से कीमती स्पेक्ट्रम बचा पाएंगे।

इसके अलावा मोबाइल आपरेटर्स को कॉल ड्रॉप घटने और डेटा स्पीड बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस तकनीक की मदद से काम करेगा। डीटीएच सैटेलाइट और इसरो की मदद से डीटीएच कवर कर पाएगा।

इतने बड़े देश को क्या है कि सेटेलाइट से चाहे वो इलाका कैसा भी हो कवर किया जा सकता है, लेकिन इंटरनेट की सुविधा वही मिल सकती है जहां संबंधित कंपनी के टावर खड़े हों। इसलिए डिजिटल तकनीकी की मदद से ब्रॉडकास्टर अपने कंटेंट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा पाएंगे क्योंकि इस सुविधा का उपयोग वो लोग भी कर सकेंगे जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है।

इंटरनेट यूजर्स के मामले में भारत है दूसरे स्थान पर चीन 7 करोड़ नेट यूजर्स के बाद 66 करोड़ नेट यूजर्स के साथ भारत दूसरे स्थान पर है। भारत में स्मार्टफोन यूजर्स 82% इंटरनेट वीडियो देखने में कार्य करते हैं। भारत में हर सेकंड मोबाइल में 10.1 लाख मिनट के वीडियो देखे जाते हैं।

कितना डेटा एक महीने में सौरभ डीवीडी देखे जाने के बराबर है। भारत में मूवी देखने का अंदाज बदलेगी। डीटीएच टेक्नोलॉजी देश में 1.2 अरब यूजर्स हैं। दो हज़ार 26 तक भारत में 100

करोड़ स्मार्ट फोन यूजर्स होंगे। डीटूएच टेक्नोलॉजी। बढ़ते हुए स्मार्टफोन यूजर्स के लिए फायदेमंद होगी। डिजिटल टेक्नोलॉजी की वजह से ब्रॉडकास्टर को होगा फायदा क्योंकि उनका प्रसारण ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगा।

अभी ब्रॉडकास्टिंग सुविधा 20 21 करोड़ टेलीविजन वाले घरों तक ही सीमित है। डीटीएच टेक्नोलॉजी आने से देश में न्यूज इसको देखना कई गुना बढ़ जाएगा तो दोस्तो आप क्या कहना चाहेंगे इस टेक्नोलॉजी के बारे में जो वाकई काफी फायदेमंद होने वाली है। हमें अपनी राय कमेंट में बताएं कि आपको इस टेक्नोलॉजी का कितनी बेसब्री से इन्तजार है तो मिलते हैं। अगले Artical में तब तक अपना ध्यान रखिए और हमारा इंतजार कीजिए बाय बाय।


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