डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या fears$

 

डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या

डर को दूर कैसे भगाएं आइए जानते हैं इसके बारे में

दुनिया के अंदर व्यक्ति को किसी ना किसी के बारे में डर तो रहता है किसी को बहुत ज्यादा डर होता है किसी को बिल्कुल कम होता है.

कई लोग ऐसा बोलते हैं हमें किसी बात का डर नहीं है तो समझ लो वह झूठ बोलते हैं.

डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या
डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या


dar ko kuch log sahi dhang se nipataa lete hai.

Dar Hai Jiski vajah se Hamari growth Hai vah Ruk Jaati Hai.

यह एक हमारे दिमाग में शैतान के रूप में घर कर लेता है  नकारात्मक सोच होती है.

डर भगाने का तरीका

आजकल हमारी जिंदगी में हमारे आसपास बहुत ज्यादा नकारात्मक चीजें होती हैं जिसकी वजह से हमारा मन है वह अच्छी तरीके से सही काम नहीं कर पाता है.

सही तरीके से काम करें यानी सकारात्मक सोच वाले बिल्कुल थोड़े से ही लोग हैं जो दूसरे लोगों को भी प्रोत्साहित करते रहते हैं.

एक दूसरे से आगे बढ़ने के तरीके में ऐसा माहौल पैदा हो गया है जिससे लोग एक दूसरे पर भरोसा बिल्कुल कम करने लगे हैं. और सभी के मन में नकारात्मक सोच ज्यादा हावी हो गई है. और यह हमारे अंदर बहुत गहराई के साथ दिमाग में फिट हो जाती हैं वह डर के रूप में उभरती हैं हमारे सामने

डर के प्रकार

  • किसी को परीक्षा में फेल होने का डर रहता है
  • किसी को ज्यादा भीड़ के सामने खड़े होने का भी पर होता है
  • किसी को ज्यादा उंचाई  पर चढाने का डर होता है तो किसी को पानी से डर लगता है
  • किसी को मौत का डर रहता है
  • किसी को अपनों के खोने का गम रहता है

डर का कारण Sanity of fears

साल भर हम सही तरीके से पढ़ाई नहीं करते हैं तो फिर हमें परीक्षा के अंदर फेल होने का मन में डर लगा रहता है. और हमारे मां-बाप हैं जो हमारे से बहुत अधिक अपेक्षाएं चाहते हैं जिससे भी हमें वह एक नकारात्मक सोच रहती है.

Kisi Ko Hamen apni baat karne se pahle yah Dar rahata Hai andar pata nahin Samne Wala Kya jawab Dega yah Hamare ko aswikar Kar Dega.

ज्यादा लोगों के सामने जाने का भी हमें डर रहता है. पता नहीं कोई कुछ कह दे हमें और अपमान हो जाए.

अगर हम कोई काम करते हैं तो हमें यह मन में डर रहता है यह काम सही होगा या नहीं होगा, समय पर होगा या नहीं होगा, बॉस का भी डर रहता है ऑफिस में.

डर के नेगेटिव प्रभाव

  • डर की वजह से व्यक्ति है वह डिप्रेशन में चला जाता है.
  • डर की वजह से मन में नकारात्मक सोच पलती है जिसकी वजह से उसका आत्मविश्वास चला जाता है.
  • डर की वजह से उसे कहीं गलत विचार आते हैं जैसे आत्महत्या करना, झूठ बोलना.
  • डर की वजह से दिमाग में ऐसी नकारात्मक में बैठ जाती है जिसकी वजह से वह आगे नहीं बढ़ पाता है.
  • डर की वजह से जो उसके अंदर से प्रतिभा है उसको वह दुनिया के सामने नहीं रख पाता है.
  • डर की वजह से और उसे कुछ अलग नहीं कर पाता और दुनिया का भीड़ का हिस्सा ही बनकर रह जाता है.

डर को कैसे भगाएं

डर को भगाने के तरीके

हमेशा सकारात्मक सोच रखें.

डर हमारे मन में तभी होता है जब हम किसी की सुनी सुनाई बातों पर अंधविश्वास कर लेते हैं. यानी पुरानी बातों को जिनका कोई औचित्य नहीं होता है. हम उनको सही मान लेते हैं कि यही दुनिया में सच है. इसके अलावा कुछ नहीं, यही एक सबसे बड़ी नकारात्मक सोच है, जिसकी वजह से हमारे दिमाग में अच्छे विचार यानी सकारात्मक सोच नहीं आती है. और हम सही तरीके से अच्छा कार्य नहीं कर पाते हैं.

डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या
डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या


अगर हम बैठे बैठे ज्यादा सोचते हैं, वह भी हमारे लिए एक नकारात्मक सोच है. जिसकी वजह से सही सोच हमारे दिमाग से दूर रहती है. और हम सही प्रकार से नहीं सोच पाते हैं जिसकी वजह से हम जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाते हैं.

पॉजिटिव सोच रखने वाले लोगों की संगति में रहे और उनसे समय-समय पर संपर्क करते रहे और उनके एक्सपीरियंस को जानते रहे.

ज्यादा से ज्यादा बुक पढ़े और अच्छे अच्छे लोगों की जीवनी आपने अच्छा देखो तभी हमारे अंदर सही विचार आएंगे.

विफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है अगर फेल हो जाते हो तो मन के अंदर निराशा मत लाइए और आगे बढ़ते रहिए.

ओल्ड मेमोरी की वजह

हमारी जिंदगी में पुराने कहीं ऐसे अनुभव यानि घटनाएं होती है जिनकी वजह से हम आगे प्रगति नहीं कर पाते हैं और उन्हीं घटनाओं को सोचते रहते हैं.

जितने भी हमारे पुराने घटना है उनसे सीख लेते हुए हमें आगे बढ़ता रहना है मन के अंदर निडरता रखनी है पुरानी बातों से परेशान नहीं होना है उनसे सीख लेना है.

गहरी सांस लेना

अगर आपके मन के अंदर कोई ऐसा डर बैठ गया है यहां फिर आप अशांति महसूस कर रहे होंगे तो आपको लंबी और गहरी सांसे लेनी है. 5 मिनट तक. जिससे आपके शरीर के अंदर एकदम शांति महसूस होगी और दिमाग शांत होगा.

Jyada Socha Na Bhavishya mein.

Kahin Bahar hai jo ham hi bahut jyada sochte Hain Ki Aane Wale Samay Mein Hamara kya hoga.

हमारा भविष्य कैसा होगा, हमें नौकरी मिलेगी या नहीं मिलेगी ,शादी कैसे होगी कब होगी. हमारे बच्चों का भविष्य कैसा रहेगा, मां बाप है जो हमारी मानेंगे या नहीं मानेंगे . इस तरह की हम ज्यादा सोचते है हैं जिसकी वजह से हमारा आज का समय हम खराब कर लेते हैं. भविष्य एक ऐसी स्थिति होती है जिसके ऊपर हमारा कोई जोर नहीं चल सकता है. हम आने वाले समय में जिएंगे या भगवान न करें मर भी सकते हैं. ईश्वर के हाथ की बात है. आप लोग हैं वर्तमान में जिए और वर्तमान के बारे में ज्यादा से ज्यादा सही तरीके से काम करें.


आत्मविश्वास पैदा करें

आजकल का समय ऐसा है कि दूसरों पर भरोसा रखना अच्छी बात नहीं है. लेकिन फिर भी मैं भरोसा रखना चाहिए यह एक अच्छी टेक्निक है. और सबसे ज्यादा भरोसा हमें ईश्वर पर रखना चाहिए क्योंकि यह GOD तुम हमारे साथ हर समय रहते हो और तुम ही हमें पॉजिटिव सोच प्रदान करते हो. आत्मविश्वास ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और  हमारे जो भी सपने हैं वह हम आत्मविश्वास के बलबूते ही प्राप्त कर सकते हैं

डर को काबू रखें

आपको किस किस टाइप से डर लग रहा है जिन जिन चीजों से आपको डर लग रहा है जिस चीज से सबसे ज्यादा डर लग रहा है उसके बारे में आप सोच से और थोड़ा बहुत गहराई के साथ विचार करिए. कि मेरे को डर क्यों लग रहा है ऐसी डर लगने वाली चीजों की आप एक लिस्ट बना सकते हैं कि हमारी ताकत क्या है और हमारी कमजोरी क्या है .

डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या
डर को कंट्रोल करने का उपाय आखिरी डर है क्या


मेडिटेशन यानी ध्यान करना

सुबह के समय आप हमेशा 20 से 30 मिनट तक अकेले में बैठ कर भगवान की प्रार्थना करें. फिर आप मेडिटेशन करते रहे ध्यान लगाएं और अनुलोम विलोम करें गहराई के साथ सांसे ले फिर अपने आत्मा की आवाज होती है उसको सुने. और जो भी आपको सिर्फ परेशान हो रही है उनके बारे में चिंतन करें और भगवान है उनसे प्रार्थना करें ताकि आपको ऐसी ताकत मिले आप आगे बढ़ते रहें आपके अंदर पॉजिटिव सोच आए.

डर को हावी ना होने दें

डर है वो कहीं रूपों में आपके सामने आकर खड़ी हो सकती हैं आपको कई तरीकों से डराया जा सकता है. लेकिन आपको अंदर से बहुत मजबूत रहना है और डरना नहीं है. डर को हावी नहीं होने देना है या नहीं उसे स्वीकार नहीं करना है. और उसका मुकाबला तक लड़ाई के साथ करना है साईं उसका परिणाम कितना भी बुरा क्यों ना हो

अपना गोल फिक्स करें

जिंदगी में हमें आगे किस तरह जाना है इसके लिए हमारे को एक लक्ष्य निर्धारित किया हुआ होना चाहिए.

अगर आपका एक लक्ष्य होता है तो आप उस तरफ भी ध्यान दोगे वरना आपके अंदर कहीं नेगेटिव ख्याल भी आएंगे कहीं गलत बातें भी आएंगे पता नहीं वह दिमाग में कर पीकर बैठे लेकिन हमें कठिन रास्तों पर होते हुए लक्ष्य की प्राप्ति करना यही हमारा पहला कार्य होना चाहिए. और जो छोटी-छोटी जीत मिलती है उनकी खुशी अलग होती है जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और मन का डर वहम कम होगा

वैसे जिंदगी के अंदर हमें थोड़ा डर भी रखना चाहिए और ना हम कहीं और बुरा ना कर दे

अगर परीक्षा में फेल होने का हमें डर नहीं होगा तो हम पढ़ाई भी नहीं करेंगे

अगर हमारे अंदर बीमार होने का डर नहीं रहता तो हम स्वास्थ्य के संबंध में लापरवाही बरतने लग जाते हैं. अगर हमारे अंदर कोई कार्य का डर नहीं रहता तो हम कार्य को बिगाड़ भी सकते हैं. इसीलिए मैं सोच पॉजिटिव रखते हुए अपने माहौल को खुशनुमा रखना चाहिए और अपने अंदर एकदम पॉजिटिव सोच रखो और दूसरों को भी पॉजिटिव सोच प्रदान करो बांटो

दोस्तों यह आलेख आपको कैसा लगा इसके बारे में कमेंट जरूर करें.

Mobile Marketing [full review]

गूगल पर ब्लॉग कैसे बनाये


Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form